पटना में रविवार शाम को अपराधियों ने एक बार फिर से बड़ी घटना को अंजाम दिया. पाटलिपुत्र इलाके में स्थित साईं मंदिर के पास लूट के इरादे से दो युवकों को गोली मार दी. जिन 2 लोगों को गोली मारी गई है उनमें से एक अमित कुमार भारतीय वायुसेना का जवान है और दूसरा उसके साथ ही अजय कुमार. मोटरसाइकिल पर सवार अपराधियों ने वायु सेना जवान को जहां दो गोली मारी वही उसके साथी को गोली छूकर निकल गई.
शाम के वक्त पाटलिपुत्र के साईं मंदिर के इलाके में गोलियों की गूंज से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया. आनन-फानन में लोगों ने दोनों घायलों को पास के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहां पर दोनों का इलाज शुरू किया गया.
इसी बीच वायु सेना जवान अमित कुमार की हालत बिगड़ने लगी और उसके परिवार वाले उसे निजी अस्पताल से निकालकर दानापुर आर्मी हॉस्पिटल ले जाने लगे मगर मौके पर एंबुलेंस नहीं होने की वजह से लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने रुबन अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की .इसके बाद अमित कुमार को घरवालों ने पुलिस की जीप में ही बैठा कर दानापुर के आर्मी अस्पताल ले गए और वहां भर्ती कराया.
पटना के सबसे वीवीआईपी इलाके पाटलिपुत्र में गोलीबारी की इस घटना ने एक बार फिर से राजधानी में सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के तुरंत बाद मौके पर पुलिस पहुंची मगर अब तक उसे कोई सुराग नहीं मिला है कि आखिर दोनों लोग पर हमला करने वाले लोग कौन थे ? पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है.
हिंदी भाषा का सबसे बड़ा महोत्सव साहित्य आजतक 2018 का आयोजन तीन दिन तक राजधानी दिल्ली में हुआ. तीनों दिन देश के कई बड़े लेखकों, कवियों, बॉलीवुड हस्तियों ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. राय शुमारी के अलावा संगीत, शास्त्रीय संगीत, सूफी का तड़का भी लगा.
साहित्य आजतक के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत बॉलीवुड अभिनेता अन्नू कपूर के साथ हुई तो अंत शास्त्रीय गायक राशिद खान की गायकी से हुआ. पूरेे दिन कई लेखकों ने अपनी बात कही तो शाम होते-होते जावेद अख्तर ने राष्ट्रवाद पर अपनी बात कही.
दस्तक दरबार मंच पर 'आओगे जब तुम साजना'
गायक और संगीतकार उस्ताद राशिद खान के नाम साहित्य आजतक 2018 की आखिरी महफिल रही. उन्होंने अपनी गायकी से सभी का मन मोह लिया. उनके द्वारा गाए गए आओगे जब तुम साजना पर दर्शक खूब झूमे.
तिवारी की उड़ान
साहित्य आजतक की हल्लाबोल चौपाल के 'तिवारी की उड़ान' सत्र में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष और फिल्म अभिनेता मनोज तिवारी ने अपने भोजपुरी अंदाज में लोगों का मन मोह लिया. मनोज तिवारी ने अपने प्रसिद्ध गानों से महफिल में समां बांध दिया.
Monday, November 19, 2018
Sunday, November 4, 2018
अपने अविष्कार से क्यों निराश हैं वेब बनाने वाले सर टिम
वर्ल्ड वाइड वेब का निर्माण करने वाले सर टिम बर्नर्स-ली ने कहा है कि वे इंटरनेट पर अपने अविष्कार के मौजूदा हाल को देखकर बेहद निराश हैं.
समाचार एजेंसी रायटर्स को दिए इंटरव्यू में सर टिम ने कहा कि कुछ वेबसाइटों पर नफ़रत फैलाने वाली सामग्री सामने आ रही हैं.
टिम ने विशेषरूप से ट्विटर की आलोचना की और इस बात पर हैरानी जताई कि आखिरकार अच्छे कमेंट के बजाय नकारात्मक कमेंट ज़्यादा क्यों फैल जाते हैं.
टिम ने सरकारों को सुझाव दिया कि वे वेब की बड़ी-बड़ी कंपनियों पर कुछ लगाम लगाएं.
टिम ने 80 के दशक में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का निर्माण किया था.
टिम ने कहा है, ''अगर आप ट्विटर पर प्रेम से जुड़ी कोई बात लिखेंगे तो वह बात कहीं गुम हो जाएगी लेकिन अगर आप नफ़रत वाली कोई बात लिखेंगे तो ये तुरंत फैल जाएगी.
टिम सवालिया लहज़े में कहते हैं, ''आपको इसकी क्या वजह लगती है, ट्विटर ने कहीं खुद को ही नफ़रत फैलाने वाले माध्यम के तौर पर तो स्थापित नहीं कर दिया है.?''
हाल फिलहाल में ट्विटर, फ़ेसबुक और कई दूसरी सोशल मीडिया वेबसाइटों की इस बात के लिए आलोचना हुई थी कि ये सोशल मीडिया साइटें नफ़रत फैलाने वाली पोस्टों को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं.
टिम कहते हैं कि वे इस वजह से बेहद निराश हैं कि इंटरनेट पर सकारात्मकता कम हुई है साथ ही इस माध्यम के ज़रिए किसी को सशक्त करने की क्षमता भी कम हुई है.
उन्होंने इस बात की भी आलोचना की कि सोशल मीडिया या इंटरनेट पर बातचीत का माध्यम महज़ कुछ ही कंपनियों के हाथों में सिमट कर रह गया है. जिसमें अमेज़न, फ़ेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल प्रमुख हैं.
टिम कहते हैं कि इससे पहले जब कभी कुछ कंपनियां अपना प्रभाव जमाना शुरू करती थीं तब सरकारें इसमें हस्तक्षेप कर ताकत के संतुलन का प्रयास करती थीं.
टिम ने यह भी कहा, ''इन बड़ी कंपनियों पर लगाम लगाने से पहले हमें देखना होगा कि कहीं इस कदम से बाज़ार को बहुत अधिक नुकसान न हो जाए.''
समाचार एजेंसी रायटर्स को दिए इंटरव्यू में सर टिम ने कहा कि कुछ वेबसाइटों पर नफ़रत फैलाने वाली सामग्री सामने आ रही हैं.
टिम ने विशेषरूप से ट्विटर की आलोचना की और इस बात पर हैरानी जताई कि आखिरकार अच्छे कमेंट के बजाय नकारात्मक कमेंट ज़्यादा क्यों फैल जाते हैं.
टिम ने सरकारों को सुझाव दिया कि वे वेब की बड़ी-बड़ी कंपनियों पर कुछ लगाम लगाएं.
टिम ने 80 के दशक में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का निर्माण किया था.
टिम ने कहा है, ''अगर आप ट्विटर पर प्रेम से जुड़ी कोई बात लिखेंगे तो वह बात कहीं गुम हो जाएगी लेकिन अगर आप नफ़रत वाली कोई बात लिखेंगे तो ये तुरंत फैल जाएगी.
टिम सवालिया लहज़े में कहते हैं, ''आपको इसकी क्या वजह लगती है, ट्विटर ने कहीं खुद को ही नफ़रत फैलाने वाले माध्यम के तौर पर तो स्थापित नहीं कर दिया है.?''
हाल फिलहाल में ट्विटर, फ़ेसबुक और कई दूसरी सोशल मीडिया वेबसाइटों की इस बात के लिए आलोचना हुई थी कि ये सोशल मीडिया साइटें नफ़रत फैलाने वाली पोस्टों को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं.
टिम कहते हैं कि वे इस वजह से बेहद निराश हैं कि इंटरनेट पर सकारात्मकता कम हुई है साथ ही इस माध्यम के ज़रिए किसी को सशक्त करने की क्षमता भी कम हुई है.
उन्होंने इस बात की भी आलोचना की कि सोशल मीडिया या इंटरनेट पर बातचीत का माध्यम महज़ कुछ ही कंपनियों के हाथों में सिमट कर रह गया है. जिसमें अमेज़न, फ़ेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल प्रमुख हैं.
टिम कहते हैं कि इससे पहले जब कभी कुछ कंपनियां अपना प्रभाव जमाना शुरू करती थीं तब सरकारें इसमें हस्तक्षेप कर ताकत के संतुलन का प्रयास करती थीं.
टिम ने यह भी कहा, ''इन बड़ी कंपनियों पर लगाम लगाने से पहले हमें देखना होगा कि कहीं इस कदम से बाज़ार को बहुत अधिक नुकसान न हो जाए.''
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