वर्ल्ड वाइड वेब का निर्माण करने वाले सर टिम बर्नर्स-ली ने कहा है कि वे इंटरनेट पर अपने अविष्कार के मौजूदा हाल को देखकर बेहद निराश हैं.
समाचार एजेंसी रायटर्स को दिए इंटरव्यू में सर टिम ने कहा कि कुछ वेबसाइटों पर नफ़रत फैलाने वाली सामग्री सामने आ रही हैं.
टिम ने विशेषरूप से ट्विटर की आलोचना की और इस बात पर हैरानी जताई कि आखिरकार अच्छे कमेंट के बजाय नकारात्मक कमेंट ज़्यादा क्यों फैल जाते हैं.
टिम ने सरकारों को सुझाव दिया कि वे वेब की बड़ी-बड़ी कंपनियों पर कुछ लगाम लगाएं.
टिम ने 80 के दशक में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का निर्माण किया था.
टिम ने कहा है, ''अगर आप ट्विटर पर प्रेम से जुड़ी कोई बात लिखेंगे तो वह बात कहीं गुम हो जाएगी लेकिन अगर आप नफ़रत वाली कोई बात लिखेंगे तो ये तुरंत फैल जाएगी.
टिम सवालिया लहज़े में कहते हैं, ''आपको इसकी क्या वजह लगती है, ट्विटर ने कहीं खुद को ही नफ़रत फैलाने वाले माध्यम के तौर पर तो स्थापित नहीं कर दिया है.?''
हाल फिलहाल में ट्विटर, फ़ेसबुक और कई दूसरी सोशल मीडिया वेबसाइटों की इस बात के लिए आलोचना हुई थी कि ये सोशल मीडिया साइटें नफ़रत फैलाने वाली पोस्टों को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं.
टिम कहते हैं कि वे इस वजह से बेहद निराश हैं कि इंटरनेट पर सकारात्मकता कम हुई है साथ ही इस माध्यम के ज़रिए किसी को सशक्त करने की क्षमता भी कम हुई है.
उन्होंने इस बात की भी आलोचना की कि सोशल मीडिया या इंटरनेट पर बातचीत का माध्यम महज़ कुछ ही कंपनियों के हाथों में सिमट कर रह गया है. जिसमें अमेज़न, फ़ेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल प्रमुख हैं.
टिम कहते हैं कि इससे पहले जब कभी कुछ कंपनियां अपना प्रभाव जमाना शुरू करती थीं तब सरकारें इसमें हस्तक्षेप कर ताकत के संतुलन का प्रयास करती थीं.
टिम ने यह भी कहा, ''इन बड़ी कंपनियों पर लगाम लगाने से पहले हमें देखना होगा कि कहीं इस कदम से बाज़ार को बहुत अधिक नुकसान न हो जाए.''
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