Wednesday, December 5, 2018

बिल्लियों जैसे लड़ रहे थे दो शीर्ष अफसर, भगवान जाने यह लड़ाई कहां तक जाती

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के बीच बिल्लियों की तरह लड़ाई हो रही थी। इन लोगों ने सीबीआई का तमाशा बना दिया। अगर सरकार दखल ना देती तो भगवान जाने यह लड़ाई कहां तक जाती। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा- यह लड़ाई सार्वजनिक हो चुकी थी। इससे देश की प्रमुख जांच एजेंसी की छवि खराब हो रही थी और उसे लेकर जनता में भरोसा कम हो रहा था। इसी वजह से केंद्र को इस मामले में दखल देना पड़ा। सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को सिर्फ छुट्टी पर भेजा गया है। उनका तबादला नहीं किया गया है।

सरकार को फैसला करना था, कौन सही-कौन गलत: वेणुगोपाल
वेणुगोपाल ने कहा- सीबीआई में जो चल रहा था, उससे केंद्र सरकार बहुत चिंतित थी, क्योंकि दो वरिष्ठतम अधिकारी सार्वजनिक रूप से लड़ रहे थे। सरकार और सीवीसी को यह फैसला करना था कि कौन सही है और कौन गलत। सीबीआई का मजाक उड़ रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा- क्या आपके पास कोई सबूत है कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा सार्वजनिक रूप से लड़ रहे थे? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को अखबारों की कटिंग दिखाईं।

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई तबादला नहीं है। सिर्फ कामकाज से जुड़ी उनकी जिम्मेदारियां वापस ली गई हैं। 

उन्होंने कहा- आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच लड़ाई बेहद संवेदनशील थी और इस पर सार्वजनिक रूप से बहस हो रही थी। सरकार भी आश्चर्य से इसे देख रही थी कि दो वरिष्ठतम अधिकारी क्या कर रहे हैं और किस तरह बिल्लियों जैसे लड़ रहे हैं।

23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया।

अस्थाना और उनकी टीम के एक डीएसपी पर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। वहीं, अस्थाना का आरोप है कि सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने ही 2 करोड़ रुपए की घूस ली है।

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